Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 29

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अद्वितीय श्रह्म ही वह हे तो उसमें अन्यथा ज्ञान केसे होता है ? ऐसी आशंका होने पर कहते हैं। अद्वितीय ब्रह्म में यह जगत्‌ है इस तरह का जो दृढ़ प्रत्यय होता है, वह अनादि काल से प्राप्त होता अज्ञान से हुआ स्वप्नस्त्री समागम के तुल्य है