Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 27
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यदि किये कि जो कोई बीज से
अंकुर आदि कार्य, अन्वय-व्यतिरेक के दिखाई देने से बिना कारण के उत्पन्न होता है, वह भी
बिना कारण के उत्पन्न नहीं होता उसकी उत्पत्ति भी अद्रय ब्रह्म से ही होती हे ।
शका - निर्विकार अद्वितीय ब्रह्म से अंकुर आदि की उत्पत्ति केसे होगी 2
उत्तर : यथास्थित परमरूप ही उद्भूत-सा (विकसित हुआ-सा) प्रतीत होता है