Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 25
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यह जो दृश्य आपके आगे दिखते हैं,
इसका मृगतृष्णा-जल के समान तथा चन्द्रमा में प्रतीत हो रहे द्वैत (द्वित्व) के समान किसी प्रकार
(79) उन्मेष - चरम साक्षात्कारवृत्ति के आविभवि से - जगत् की सत्ता का लय होता है ।
निमेष से-स्वप्नरूप के आवरण से जगत्-सत्ता का उदय होता हे ।
भी संभव नहीं हे