Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 92
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 92 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 92
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
आकाश से भी बढ़कर अणुता नाम का धर्म कहाँ प्रश्तिद्ध हैं ? जो कि संविकाकाश का (ब्रह्म
का) धर्म होगा, इसलिए आकाश से भी बढ़कर अणुता उका धर्म नहीं है / तब अणुता कहने
का तात्पर्य क्या है ? इस आशंका पर कहते हैं /
जगत् का आकार स्थूल आकार अणुरूप कारण के बिना नहीं बन सकता, यह कहने के
लिए उसे अणु कहा है