Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 74
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 74
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
जयव्-शून्य चिदाकाश का जो स्वरुप पहले द्ष्टान्तपूर्वक अनेक बार अनुभव में बैठाया ग्या
है, उसका स्मरण कराते हैं /
अत्यन्त दूर से भी दूर एक देश से दूसरे देश की प्राप्ति में दोनों देशों के मध्य में एक क्षणभर
के लिए संवित् का जो स्वरूप है, वही निर्विषय चिदाकाश का स्वरूप समझिये