Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 38
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
आज ही आत्मज्ञान से क्या प्रयोजन हे आगे चलकर कभी आत्मज्ञान कर लेंगे यों स्रोचनेवाले
के प्रति कहते हैं ।
जो पुरुष, आज ही मृत्युरूपी आपत्ति की चिकित्सा (प्रतीकार का उपाय) नहीं करता वह मूढ़
मृत्यु जब सिर पर सवार होगी तब व्याकुलावस्था में क्या करेगा ?