Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 20
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तो किस ग्रन्थ को लेकर विचार का अभ्यास करना वाहये जिससे जल्दी से जल्दी बोध चिद्धि
को प्राप्त हो सकता हैं, ऐसा यदि कड पुछे तो उस पर कहते हैं ।
शम, दम आदि साधनों से सम्पन्न पुरुष को आलस्य, बेचैनी आदि उद्वेग ओर उनके कारणभूत
यथेष्ट भोजन, कुसंगति आदि का परित्याग कर और क्षणभर के लिए गुरुसेवा आदि का नियम
लेकर इस महारामायण नामक शास्त्र का प्रतिपादन विचार करना चाहिये । यह इस लोक ओर
परलोक-दोनों लोकों में हितकारी और कल्याणकारी है