Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 104, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 104 · श्लोक 13
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
यदि काढी प्रश्न करे कि कृपया आप ही बतलाइये आपका केसा सिद्धान्त है, तो इस पर
कहते हैं।
द्वैत न तो सृष्टि के आदि में ही उत्पन्न हुआ और न आज ही इसका अवभास होता है, एकमात्र
चिदाकाश ही जगत् के रूप से प्रतीत होता है