Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
क्व नाम जन्ममरणे क्व भवाभवभूमयः ।
संविदात्मकमेवेदं व्योम व्योम्नि विवर्तते ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
परमार्थ ट्वष्टि से तो जन्म और मरण की प्राप्ति नहीं है, यह कहते हैं /
विचार कर देखिये न, वस्तुतः जन्म और मरण कहाँ है ? उत्पत्ति और विनाश की भूमियाँ कहाँ
हैं ? यह सब सर्वात्मक चिदाकाश ही चिदाकाश में विवर्तभाव को प्राप्त हो रहा है