Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
मृताः पितामहाद्याश्चिन्न मृता सा म्रियेत चेत् ।
तज्जन्म नैव नाम स्यादस्माकं मृतसंविदाम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हम लोगों के पितामह
आदि के शरीर मर गये, किन्तु उनकी चिति तो नहीं मरी । यदि वह भी मर जाती, तो फिर
मृत आत्मावाले उनका पुनर्जन्म ही न होता और तुल्यन्याय से हम लोगों का भी पुनर्जन्म न
हुआ होता