Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
वादिनः सौगताद्या ये ये लोकायतिकादयः ।
संविदाकाशमुत्सृज्य यन्मन्यन्ते तदुच्यताम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
इन सब बातों का निचोड़ यह निकला कि स्रंविदकाश ही सभी वादियों के अपने-अपने
अभिमत पदार्थो के आकार से सर्वत्र प्रतीत होता है / उसके बिना अन्य कड ग्रति नहीं है,
इस आशय से कहते हैं /
हे श्रीरामजी, सौगत आदि जो वादी हैं तथा लोकायतिक (चार्वाक) आदि जो वादी हैं, वे
सबके सब संविदाकाश के सिवाय जो पदार्थ मानते हैं, कहिये वह क्या है ?