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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, Verse 51

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

निर्मानमोहा जितसङ्गदोषाः प्रवाहसंप्राप्तनिजार्थभाजः । तिष्ठन्ति कार्यव्यवहारदृष्टौ निरामया यन्त्रमया इवैते ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

उनकी उस प्रकार की स्थिति की लक्षण द्वारा पहचान कराते हैं / मान और मोह से विहीन, संगरूपी दोषपर विजय पा चुके (स्त्री, पुत्र आदि की आसक्ति से रहित), लोकप्रवाहवश आत्मकर्तव्य करनेवाले और दोषलेशरहित महापुरुष यन्त्रमय (पुरुषप्रतिमा) के समान हैं, वे औरों की कार्यव्यवहारदृष्टि में स्थित होते हैं