Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
यद्यथा चेत्यते येन तज्जीवेनाशु तेन तत् ।
चिद्रूपेणाप्यते सिद्धमेतदाबालमक्षतम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार से भी वही प्रिद्ध हुआ जिसकी हमने पहले प्रतिज्ञा की थी, ऐसा कहते हैं /
जो जिस पदार्थ की जिस प्रकार भावना करता है, चिद्रूप वह जीव शीघ्र ही उसको प्राप्त होता
है, यह बात बालकों से लेकर बड़े-बूढ़ों तक सब पर प्रसिद्ध है