Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
नेह कार्यं न वाऽकार्यमस्ति किंचिन्न कुत्रचित् ।
सर्वं शिवमजं शान्तमनन्तं प्राग्वदास्यताम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ पर न कहीं कोई कार्य है और न कहीं कोई अकार्य (त्याज्य) है, किन्तु सब अज, शान्त,
अनन्त तथा शिवस्वरूप ब्रह्म ही है, इसलिए हे श्रीरामजी आप जैसे हैं वैसे ही स्थित
रहिये