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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

मा कर्मफलबुद्धिर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि । उभयं वा त्यजैतत्त्वमुभयं वा समाश्रय ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

कर्मफल में आपकी आसक्त बुद्धि न हो और कर्मों के त्याग में भी आपकी आसक्ति (कर्मत्याग के फल में आसक्ति) न हो। इन दोनों का आप त्याग कर दीजिये या आप इन दोनों का आश्रय कीजिये । फल में आसक्ति न करने पर कर्म करने या छोड़ देने में कुछ भी विशेषता नहीं रहती