Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सर्वकर्मफलाभोगमलं विस्मृत्य सुप्तवत् ।
प्रवाहपतिते कार्ये स्पन्दस्व गतवेदनम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
(अवेदनमसकल्पस्तन्मयेनैव श्रयताम्“ यह जो ऊपर कहा ग्या हैं उसका व्यवहारकाले भी
उपयान करते हैं /
हे श्रीरामजी, समस्त कर्म और उनके विस्तृत फलों को, सोये हुए की नाई, बिलकुल भूलकर
प्रवाहपतित (प्रारब्धानुसार प्राप्त हुए) कर्म के लिए संकल्पशून्य होकर स्पन्दन करते चलिये