Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 95, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 95, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तनुत्वं सर्वबोधस्य यत्तदेव हि कारणम् ।
सर्गोपशमसंपत्तौ प्रतिपन्ने परे पदे ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान को शिथिल बना देने में एकमात्र कारण है-इद्धियनिरोध के अभ्यास से बाह्मवृत्तियों का
शिथिलीकरण, यह कहते है ।
समस्त बाह्याकार वृत्तियों का जो अपक्षय है, वही क्रमशः तत्त्वज्ञान के सम्पादन द्वारा परम पद का
साक्षात्कार हो जाने पर इस भ्रमात्मक प्रपंच की शान्ति में कारण हो जाता है