Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
मूर्खस्य तु मनस्त्यागो नूनं दुःसाध्यतां गतः ।
पामरस्येव साम्राज्यं तृणस्येव सुमेरुता ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
तब क्यो उसका सब लोग सम्पादन नहीं करते, इस पर कहते हैं।
मूर्ख के लिए तो चित्त का परित्याग करना उतना दुःसाध्य है, जितना पामर के लिए साम्राज्य और
तृण के लिए सुमेरुरूपता प्राप्त करना दुःसाध्य है