Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 65
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, verse 65 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
पितामहानां पुत्राणां पितृणां च जगत्त्रये ।
आद्यः पितामहः कस्मात्पूर्वोत्पत्तौ न कारणम् ॥ ६५ ॥
हिन्दी अर्थ
गढ अभिप्राय को न समझ रहे राजा शिखिध्वज आशंका करते हैं।
राजा शिखिध्वज ने कहा : हे मुनीश्वर, तीनों लोक में प्रजा उत्पन्न करनेवाले दक्ष प्रजापति आदि
पितामहो, उनके लड़कों और पिता आदि पूर्वो की उत्पत्ति मे आद्य पितामह (हिरण्यगर्भ) कारण क्यों
नहीं है ? अर्थात् सूक्ष्मभूत लिंगसमष्टिरूप वह हिरण्यगर्भ पुत्र, पिता ओर पितामह आदि सम्पूर्ण व्यष्टि
ओर समष्टिरूप स्थूलो की उत्पत्ति में कारण क्यों नहीं है ?