Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
चेतसः किं मुने मूलं कोऽकुंरः कोऽस्य संभवः ।
काःशास्त्राःकेच वा स्कन्धाः कथमुन्मूल्यते च सः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा
शिखिध्वज ने कहा : हे मुने, चित्त का मूल क्या है, अंकुर क्या है और इसका कौन-सा खेत है। इसकी
शाखाएँ ओर स्कन्ध कौन हैं तथा यह भी कहने की कृपा कीजिये कि यह समूल कैसे उखाड़ कर फेंक
दिया जाता है