Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
सात्त्विकः प्राकृतो भागो राम तज्ज्ञो हि यो भवेत् ।
न समुत्पद्यते भूयस्तेनासौ मुक्त उच्यते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए उनके उपासको को भी ज्ञानप्राप्ति के द्वारा पुनर्जन्म की निवृत्ति होती है, यह अत्यन्त
प्रसिद्ध है, ऐसा कहते है ।
हे श्रीरामजी, सात्विक शिवादि मूर््रित्रयात्मक प्राकृत अंश की जो उपासना करता है, वह पुनः इस
संसार में उत्पन्न नहीं होता, इसलिए वह मुक्त कहलाता हे