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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

वासना चेह नास्त्येव साहंकारादिरूपिणी । असत्यैवोदिता मौर्ख्यान्मरुभूमाविवाम्बुधिः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

अज्ञवशा में अर्थक्रिया में समर्थ सत्यभूत वासना का ज्ञान से वाध कैसे होगा, इस पर कहते हैं। हे साधो, अज्ञानदशा में भी वासना वास्तव में नहीं रहती, परन्तु मूर्खता के कारण अहंकार आदि का रूप धारण कर असत्यरूप से ऐसे उदित हुई है, जैसे मरुभूमि में असत्यरूप से जल