Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, Verses 70–74
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, verses 70–74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 70-74
संस्कृत श्लोक
प्रसुप्तवासनाः केचिद्यथा स्थावरजातयः ।
प्रबुद्धवासनाः केचिद्यथा नरसुरादयः ॥ ७० ॥
सवासनाविलाः केचिद्यथैते तिर्यगादयः ।
प्रक्षिप्तवासनाः केचिद्यथैते मोक्षगामिनः ॥ ७१ ॥
अथ स्वास्वेव संवित्सु मनोबुद्ध्यादिकाः कृताः ।
हस्तपादादिसंयुक्तैः संज्ञाः पञ्चकराशिभिः ॥ ७२ ॥
तिर्यगादिभिरप्यन्यैरन्याः संज्ञाः प्रकल्पिताः ।
स्थावरादिभिरप्यन्यैरन्यान्याः संविदः कृताः ॥ ७३ ॥
इति साधो स्फुरन्तीमे चित्राः पञ्चकराशयः ।
रूपैराद्यन्तमध्येषु चलाचलजडाजडैः ॥ ७४ ॥
हिन्दी अर्थ
वासना के स्वाप और प्रबोध के तारतम्य से पवको मे स्थावरादि की विचित्रता कैसे उत्पन्न होती
है, यह उदाहरण दिखलाते है ।
ओर इन में कोई-कोई जैसे स्थावरादिजाति प्रसुप्तवासनावाले हैँ ओर कोई-कोई जैसे नर-सुर
आदि प्रबुद्ध वासनावाले हैं । कोई-कोई जैसे ये पशु, पक्षी आदि वासनाओं के कारण अस्वच्छ चित्त
से युक्त हैं और कोई-कोई जैसे ये मोक्षगामी, वासनाओं को त्याग चुके हँ । वासना की विचित्रता
से ही देव, नर आदि पंचतत््वराशि, आकाश तथा भूमिपर गमन आदि विचित्र व्यवहार के योग्य हस्त,
पाद आदि तथा इनसे कल्पित कर्मेन्द्रियं से युक्त देव, नर आदि पंचकराशियों द्वारा अपनी-अपनी
संवित् में मनुष्यादिव्यवहार के योग्य मन, बुद्धि, अहंकार, चित्त, चक्षु, कर्ण, प्राण, रसना, त्वक्
आदि आभ्यन्तर ओर बाह्य करण रूप संज्ञाएँ की गयी हैं, यही कारण है कि प्रत्येक प्राणी में विचित्र
स्वभाव की वे संज्ञाएँ दिखाई देती हैँ । पशु आदि ने अन्य ही संज्ञाओं की कल्पना की है अर्थात् चार
पैर, दो सींग तथा एक पुच्छ की; पक्षियों ने चच, पाँख, पूछ और पैरों की; संपा ने फन, भोग और
पूँछ की तथा कृमि, कीट, दंश, मशक आदिने अपनी-अपनी वासनाओं के अनुरूप व्यवहार के योग्य
अवयवादि संज्ञाओं की कल्पना की है । इसी तरह स्थावरादि दूसरों ने भी अन्यान्य संविदं की
कल्पनाएँ की हें । हे साधो श्रीरामचन्द्रजी, इसी तरह काल्पनिक स्वस्वरूप से आदि, अन्त ओर मध्य
में विकारी ओर जड तथा अधिष्ठानसद्रूप से अचल और अजडरूप से ये विचित्र भूतपंचकों की
राशियाँ स्फुरित हो रही हैं