Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अज्ञानाद्वृद्धिमायाति तदेव स्यात्फलं स्फुटम् ।
ज्ञानेनायाति संवित्तिस्तामेवान्ते प्रयच्छति ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
वह अविद्या
अज्ञान से वृद्धि प्राप्त करती है ओर बाद में अज्ञानरूप फल देती ही है । ज्ञान से संवित्ति अर्थात्
उत्तरोत्तर भूमिका की प्राप्तिस्वरूप ज्ञानवृद्धि प्राप्त करती है और अन्त में अर्थात् सप्तभूमिका में
तत्त्वज्ञानरूप फल देती हे