Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
इतः पृथ्वीत्वमायाता तथेतो द्युतया स्थिता ।
इतश्चन्द्रार्कतां प्राप्ता तथेतस्तारकाकृतिः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं तो वह पृथिवीरूपता को प्राप्त हुई है और कहीं द्युलोकरूप
से अवस्थित हुई है । उन्होने कहीं चन्द्र ओर सूर्यरूपता प्राप्त कर ली है ओर कहीं तो तारों के
आकार को धारण किया है