Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 70, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 70, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
संसृतिस्वप्नविभ्रान्तौ वेतालोदाहृतानिमान् ।
प्रश्नानाकर्णय शुभान्प्रसङ्गात्स्मृतिमागतान् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
“असदेव मनागेव इस अर्थ का समर्थन करने के लिए कथा का आरम्भ करते हैं।
भद्र, इस संसाररूपी स्वप्नविभ्रम में वेताल द्वारा किये गये इन उत्तम प्रश्नों का आप श्रवण
कीजिये, जो प्रसंगवश स्मृतिगोचर हुए हैं