Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
सौवर्णकलशाम्भोजकलिकामातुलुङ्गवत् ।
दृश्यते स्त्रीस्तनश्रेणी रक्तपूतिसुगन्धिका ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
वास्तव में लहू या पीव (मवाद) की दुर्गन्ध ही जिसकी सुगन्ध है, ऐसी स्त्रयो की स्तन श्रेणी जो लोक
में सुवर्णकलश, कमल-की कली एवं बिजोरा नींबू के सदृश दिखाई पडती है, वह केवल अज्ञान की ही
विभूति है