Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
स्फुरन्त्याकस्मिकोद्धूता विचित्रद्रव्यशक्तयः ।
स्वभावमात्रसंपन्नाः स्पन्दश्रिय इवाम्भसः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र अधिष्ठान ब्रह्म की सत्ता से
अपने स्वरूप का लाभ करनेवाली तथा अतर्कित वासना के वैचित्र्य से प्रकम्पित हुई चित्र-विचित्र
द्रव्यो की जो शक्तियो प्रस्फुरित होती हैं, वह भी माया का विलास हे