Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
विशत्यविरतं भूतसर्गपांसुपरम्परा ।
नित्यं नियतिवात्येयं कालव्यालगलान्तरम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राणियों की सृष्टिरूपी धूलि की पंक्ति से युक्त नियतिरूपी आँधी कालरूपी सर्प के गले
के भीतर सर्वदा प्रवाहरूप से जो प्रविष्ट होती है, वह भी अविद्या का नृत्य है