Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
तरङ्गफेनमालेव सैवान्येव च भङ्गुरा ।
श्वःश्वोऽपरेन्दुलेखेव समुदेति विचित्रता ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
जलतरगों
के फेनं की माला की नाई भंगुर तथा एकमात्र तत्स्वरूप भी अन्य के सदृश प्रतीयमान प्रतिदिन पृथक्
परिमाणवाली चन्द्रलेखा के सदुश जो सृष्टि-वैचित्रय उदित होता है, वह भी अज्ञान का विलास
है