Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
सृष्टेः कतिपयं कालं प्रहृष्टाः कुलशालिनः ।
अधःकृतोग्रनरकपङ्काः शङ्कोज्झिताः क्षणम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वात्मतादात्म्य
अध्यास से जिन्होंने रक्त, मांस, मल, मूत्र आदि देहरूप उग्र नारकीय कीचड़ का तिरस्कार कर
दिया है, ऐसे उक्त शंका से निर्मुक्त होकर “हम कुलीन महाशय हैं” इस प्रकार अभिमान करके कुछ
काल तक जो फूलकर स्थित रहते हैं, वह भी अज्ञान का विलास हे