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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 66

पैसठवाँ सर्ग समाप्त छासठवाँ सर्ग प्रयत्नपूर्वक खोजे गये भिक्षु का तथा भिक्षुसदृश भूत-भावी अन्य मुनियों का दर्शन, यह वर्णन ।

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  1. Verses 1–16महर्षि वाल्मीकिजी ने कहा : मुनि वसिष्ठजी से समन्वित ओर विश्वामित्र आदि ऋषियों से युक्त आक…
  2. Verse 17यों ब्रह्माण्ड के भेद से जब पदार्थक्रम एक-सा है तब भिश्च भी अनन्त हो सकते है । भद्र, उसी…
  3. Verses 18–28इस अर्थ में मुमुश्चव्यवहारप्रकरणोक्त अर्थ का ही विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं। श्रीरामजी,…