Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 61, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 61, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
स्वप्नोऽयं पुरुषस्यास्य प्रतिभासस्य यो भवेत् ।
रामाऽस्मदादिसर्वात्मा भवेत्तादृश एव च ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, इस शयनस्थ पुरुष को अनुभूयमान यह प्रसिद्ध हम, तुम आदि समस्त जीव
जगत्-स्वरूप स्वप्न जैसा ही यानी अनादि अनन्त प्रवाहरूप हे, वैसा ही प्रजापति का भी स्वप्न है