Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
सर्वैर्भावविकारैस्तु नित्योन्मुक्तस्त्वलेपकः ।
नात्मास्तमेति भगवान्न चोदेति सदोदितः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार निर्विकारिता और सविकारिता आदि से जनित विरोध के कारण भी सम्बन्ध की प्रसक्ति
नहीं है, ऐसा कहते है ।
समस्त भावविकारों से नित्यमुक्त एवं निर्लिप्त सर्वविध ऐश्वर्यसम्पन्न आत्मा न अस्त होता है
ओर न कभी उदित ही होता है, क्योकि वह सर्वदा उदित स्वभाव ही है