Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
ईर्ष्याकमलिनी चिन्ताषट्पदा विलसत्यलम् ।
प्रतिजन्मप्रमृष्टोग्रदुःखकल्लोलविभ्रमम् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
मरणरूपी बडवाग्नि अज्ञपुरुष के प्रति ही, जिसने कि प्रतिजन्म में
अनेक तरह के प्रतीकारोपायरूप तट के आश्रय से उग्रदुःखरूपी तरंगविभ्रमों का परिमार्जन किया
है, बार-बार, समुद्र की नाई, प्राप्त होता है