Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 6, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
विद्यते पतगच्छायो रागविद्रुमदुर्द्रुमः ।
तरुच्छदलसद्धूमः शस्त्रजालरदोल्मुकः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानी के मनरूपी जलशून्य
अरण्य में कम्पित हो रहे ओष्ठरूपी तरुपल्लवों पर प्रकाशमान निःश्वासरूपी धूओं से युक्त तथा
शस्त्रसमूह की नाई कटकटायमान दाँतरूपी उल्मुक (लाठी) से युक्त शरीर को संताप देनेवाला
द्वेषरूप दावानल मानों भस्मीभूत होता रहता हे