Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
असंविदन्सुखं दुःखं लाभालाभौ जयाजयौ ।
शुद्धं ब्रह्मैकतां गच्छ ब्रह्माब्धिस्त्वं हि भारत ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे भारत, सुख, दुःख, लाभ, हानि, जय ओर पराजय किसी पर भी दृष्टि
न देकर युद्ध कर रहे तुम एकमात्र ब्रह्मरूप हो जाओ, क्योकि तुम अवश्य ब्रह्मरूप समुद्र हो