Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 54, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 54 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
ब्रह्माम्बुधौ तरङ्गत्वं किंचिद्भूत्वा विलीयते ।
ब्रह्मावर्ते स्फुरस्यद्य ब्रह्मैवासि निरामयम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
कोन्तेय, ब्रह्मरूपी महान् सागर में
कुछ तरंगरूप उत्पन्न होकर विलीन हो जाता है, आज बोधोदयकाल में ब्रह्मावर्त में तुम स्फुरित हो
रहे हो, तुम सर्वविध विकारवर्जित ब्रह्मरूप ही हो, पृथक् नहीं