Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि ।
यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्णं भूतो मे अधिष्ठानरूप से स्थित आत्मा को, उस आत्मा में अध्यस्तरूप से स्थित
सम्पूर्ण भूतो को तथा अकर्ता आत्मा को यानी प्रतिबिम्बो की चित्र-विचित्र चेष्टाओं से अलिप्त दर्पण
की नाई कर्तृत्व आदि धर्मो से शून्य आत्मा को जो देखता है, वही ब्रह्म का साक्षात्कार करता है