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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 57

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 57

संस्कृत श्लोक

इदं चाहमिदं नेति इतीदं कथ्यते मया । एवमात्मास्मि सर्वात्मा मामेवं विद्धि पाण्डव ॥ ५७ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं नहीं हूँ” - इस प्रकार का अर्थविभाग और शब्दविभाग जो मुझसे कहा जाता है, वह दर्पणस्वरूप का परिचय कराने के लिए दर्पणअदर्पण विभाग कथन के सदुश आत्मस्वरूप का परिचय कराने के लिए ही कहा जाता है । दर्पण के सदृश लिप्त न होनेवाला अद्वितीय आत्मरूप मे सर्वात्मा हूँ । उसी तरह का तुम मुझे तत्त्वतः जानो