Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
त्रैलोक्यचेतसामन्तरालोको यः प्रकाशकः ।
अनुभूतिमुपारूढः सोऽहमात्मेति निश्चयः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी के द्वारा अनुभूत न होने से उस आत्मा में प्रसक्त हुई अत्यंत परोक्षता का निवारण करते हैं ।
तीनों लोकों के चित्तों में भीतर प्रकाश करनेवाला जो आलोक है और ज्ञानियों की अनुभूति में
साक्षीरूप से जो आरूढ़ है, वही अहंशब्द का लक्ष्य आत्मा है - यही निश्चय है यानी यथार्थ विचार
है