Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अजडे जडता तात जडे चाजडतोदिता ।
असत्ये सत्यता जीवजीवानुभवमोहतः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
वस्तुस्वभाव से विपरीतता दिखाई पड़ने के कारण भी इसकी स्वप्नता सिद्ध होती है, यह कहते हैं ।
हे तात, समष्टि-जीव के एकदेशभूत जो व्यष्टि-जीव हैं, उनके अनुभवस्वरूप भ्रान्ति से
जडताशून्य ब्रह्म मेँ भूत-भुवनादि की जडता, अहंकार से लेकर देहपर्यन्त सभी जड़-पदार्थों में
आत्मत्वाभिमान से अजडता एवं असत्य में सत्यता उदित हुई है