Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verses 29–30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, verses 29–30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
युधिष्ठिर इति ख्यातो धर्मपुत्रो भविष्यति ।
अम्भोधिमेखलाभूपःपाण्डोः पुत्रः स धर्मवित् ॥ २९ ॥
दुर्योधन इति ख्यातस्तस्य भ्राता पितृव्यजः ।
भविष्यति दृढद्वन्द्वो भीमो बभ्रुरहेरिव ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
ओर, चारों समुद्ररूपी करघनी पहनी हुई
पृथिवी का अधिपति एवं धर्म का पुत्र "युधिष्ठिर" इस नाम से प्रसिद्ध होगा । वह पाण्डुपुत्र "धर्मज्ञ"
होगा