Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

अथैतानि विचित्राणि भूतानि बहुयुक्तिभिः । क्षिपयन्ति सुरा राम भुवो भारनिवृत्तये ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर (जब यह पृथिवी प्राणियों के भार से दबने लगती है तब) उस पर पड़े बोझ की निवृत्ति के लिए भगवान्‌ कृष्णचन्द्र आदि सब देवता अनेक प्रकार की युक्तियों से यानी अपने अंशावतार तथा महाभारत की लड़ाई आदि अनेक उपायों से इन विचित्र प्राणियों को मार डालते हैं