Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
न विद्यादिविलासोऽस्ति सोस्ति नास्तीव यः सदा ।
परमात्मेति कथितो मनःषष्ठेन्द्रियातिगः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
तब तत्त्वज्ञान से आविर्धुतस्वरूप होने से पहले संवेदनस्वरूप भी असत् क्यो नहीं होता ? इस पर
कहते हैं।
श्रीरामभद्र, तत्त्वज्ञानात्मिका विद्या और चरमप्रमाणभूत मनन आदि का विलास अपना कुछ भी
अस्तित्व नहीं रखता; “हे ही नहीं” ऐसा अज्ञानियों द्वारा जो तर्कित होता है, वह सदा ही विद्यमान है;
वही "परमात्मा" इस नाम से कहा गया है और वही मन के साथ इन्द्रियों का अविषय है