Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 71
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, verse 71 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
अब्धिर्यथा जलमपास्तसमस्तभेदः खादच्छमेव सकलं द्रवमेकशुद्धम् ।
सर्वं तथेदमपहस्तितभेदजातमाद्यं परं पदमनामयमेव बुद्धम् ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वतः विचारा गया समुद्र जैसे तरंग आदि
समस्त विभेदं से शून्य हुआ-आकाश से भी स्वच्छ-सम्पूर्णरूप से केवल विशुद्ध द्रवात्मक जल स्वरूप
ही है, वैसे ही यह जगत् भी तत्त्वतः ज्ञात हुआ वासनाकालीन समस्त विभेदं से शून्य विकारवर्जित
केवल परमपद ब्रह्मस्वरूप ही है