Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
मनोबुद्धिरहंकारस्तथा तन्मात्रपञ्चकम् ।
इति पुर्यष्टकं प्रोक्तं देहोऽसावातिवाहिकः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
अब, कर्थचित् पांचभौतिक स्थूलशरीर की निवृत्ति होने पर भी मोक्ष के बिना लिगदेहात्मक पुर्यष्टक
की निवृत्ति हो ही नहीं सकती, इस आशय से उसे दिखलाते है ।
मन, बुद्धि, अहंकार एवं पाँच सूक्ष्म तन्मात्राएँ - इन आठों का समूह पुर्यष्टक कहा गया है और यही
“आतिवाहिक” देह कही गई हे