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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 39

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

काले काले चिता जीवस्त्वन्योन्यो भवति स्वयम् । भाविताकारवानन्तर्वासनाकलिकोदयात् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव कालभेद से जीव मे अहमाकारभेद का अनुभव होता है, यह कहते हैं। चैतन्य से भीतर वासनारूपी कलियों का विकास होता है; उसी से यह जीव विचित्र तरह से भावित आकारवाला होकर समय-समय पर स्वयं भिन्न-भिन्न रूप का हो जाता हे