Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
जीवत्वमिव संप्राप्ता पुर्यष्टकपदस्थिता ।
कला कलङ्ककलिता चितिराबोधनोन्मुखी ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवरूपता
को प्राप्त हुई-सी, पुर्यष्टकरूप पद में स्थित, अतएव मायारूपी कलंक से वेष्टित तथा जीव को बाह्य
विषयों का दर्शन कराने के लिए उत्सुक यह चिति जिसकी जैसी भावना करती हे, भलीभाँति उसका
वैसा ही अनुभव कर लेती हे