Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
नित्यमसक्तमतिर्मुदितात्मा शान्तमृषासुखदुःखविदन्तः ।
तिष्ठ निविष्टमतिः समतायामस्तसमस्तभवामयमायः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, सदा विषयासक्त बुद्धि से शून्य, प्रसन्नात्मा, हृदय में मिथ्याभूत सुखदुःख का
अनुभव करनेवाली बुद्धि से रहित, समस्त संसाररूप रोगात्मक माया से वर्जित तथा ब्रह्मस्वभाव समता
में प्रविष्टमति होकर अपने स्वरूप में स्थित रहिए